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Kailash D. Rathod

गोर समाजेर ४० आमदार आसकच पण पहिले समाजेन जोडणो पडिये ४ आमदार तो ३० वर्षेती जितन आरेच तरी काई बद्दल घडो कोनी समाजेम छ जकोच छ…एक आमदार पहिलेती विधान सभाम छ ५ आमदार बंजारा समाजेर विधान सभा हाला सकच पण वोंदुन समाजेर प्रती विचार छेनी…समाज फक्त नामे वास निवडन देरेच..कारण नामी रोवच नामेवास .निवडन आयेवाळ…

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“जर समाजेर विचार किदे तो”

दोस्तों आपण आज 21 वे शतके र माई छा।आपण विचार वजी खुप लार छ ये विचारेन गती निर्माण करो समाजेम जुडो अन समाजेन जोडो जो मारो गोर भाई समाजे वास निःस्वार्थ काम कर रोच वो भाईर गोर बंजारा संघर्ष समिति र सारी स्वयंसेवक भाई वडीती आभार कराचा कारण गोर बंजारा संघर्ष समिति न ओसे लोकूर…

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समाज और मौका

दोस्तों गोर बंजारा संघर्ष समिति के साथ जुड़कर हम जो काम कर रहे है इसका हमें अभिमान है।उसी तरह हम जो भी काम समाजहितों के संबंधी होंगे वही हमारा लक्ष होगा।हमें हमारे समिति के भाई जन निःस्वार्थी स्वयंसेवको के साथ काम करने का मौका मिला है।क्योंकि समाजहित मे जो भी काम करता है।उसे खुद भगवान…

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Gajanan Rathod

गोर बंजारा संघर्ष समिति परिवारेर भाई बंधू न एक नम्र विनंती छ की आपणे मनेमाई जे काई समाजे विषयी ज्ञान, विचार, सल्ला ये सारी वाटे आपणे भाई वनून व्हाॅटसाप व फेसबुके माध्यमे माई ती शेअर करो कारण ये वाते आसी छ की जतरा तम वाटप करते रीयो वतरा वाढती रच वजी खुप काई छ समाजेन…

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गोरचिंतन

मारो मन पराजीते न पुछो , तु केर कन जाणो पसंद करेची भिया, पराजीत बोलो ,म असे लोकुर शिकार करूचु ,जो मोह ,लालची, व्यसनी, लोभी ,धन, पिसा अडका वास ,पद प्रतिष्ठा वास, जो खुदेर जमीर रिस्ते, नाते ,मित्रता, ए से चिंजे दावेपर लगाडच असे लोकुर कन जाणो म घणणो पसंद करूचु। कारण असे लोक घण…

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प्रसार ज्ञान,विचार व सल्ला

गोर बंजारा संघर्ष समिति परिवारेर भाई बंधू न एक नम्र विनंती छ की आपणे मनेमाई जे काई समाजे विषयी ज्ञान, विचार, सल्ला ये सारी वाटे आपणे भाई वनून व्हाॅटसाप व फेसबुके माध्यमे माई ती शेअर करो कारण ये वाते आसी छ की जतरा तम वाटप करते रीयो वतरा वाढती रच वजी खुप काई छ समाजेन…

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जिवण इ एक जञा

भाईयो जिवण इ एक चार दनेर जञा छ।ये जञा माई जे काई लेयेर छ ऊ लेलो भियाओ चार दने माईती दी दन तो आपण काई ला करन विचारे म चलेगे तो भियाओ बचे छ फक्त दी दन ओ दी दने माई काई आसो चिज लो की दुनिया आपणेन जन्मो जन्मी ध्यान रकाडीय कुनसी आसी चिजे…

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“टूटते परिवार, दरकते रिश्तें”

“टूटते परिवार, दरकते रिश्तें” एक समय था, जब लोग समूह और परिवार मे रहना पसंद करते थे।जिसका जितना बड़ा परिवारहोता वो उतना ही संपन्न और सौ भाग्यशाली माना जाता था और जिस परिवार में मेल-मिलाप होता था और संपन्नता होती थी उसकी पूरे क्षेत्र में प्रतिष्ठा रहती थी।वह ऐसा समय था, जब समाज मे परिवारों…

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