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Gajanan D Rathod

मेरे गोर बंजारा भाईयों आज हम गोर बंजारा संघर्ष समिति व्दारा समाजहित मे जो कार्य कर रहें है।उसी कार्य की सुरवात हमें अपने आपसे करनी है।क्योंकि आज अगर हम समाजहित मे सोचेंगे तो कल की युवा पिढी हमारे आपणे संस्कारों के सहारे हमारे समाज को उस बुलंदीओ तक पहुँचाने मे कोई कसर बाकी नही रखेंगे।तो…

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“बंजारा समाज का इतिहास सदियों पुराना हैं”

“बंजारा समाज का इतिहास सदियों पुराना हैं” वैसे तो संपूर्ण भारत देश में भिन्न–भिन्न समाज जाति धर्म के लोग निवास करते हें, जिनमें से एक बंजारा समाज है, जिसका इतिहास वर्षों नहीं सदियों पुराना है । भारत में वर्तमान में बंजारा समाज कई प्रांतों में निवास करता है। महाराष्ट¬, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश एवं…

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Pravin Naik, A.P.

Dear firends, Believers /thinkers /Disciples of SEVALAL BHAYA India is a treasure trove of traditions, each with its own habits and customs. Amongst one such is the tradition of the lambanis, who are widely known for the colourful dresses they make and origin from rajashthan mainly from mewad and chithorgad .They were the follower of…

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Pravin Naik, A.P.

Dear fiends, Teacher Day: Educationist /Student /Researchers/Teachers. Different countries celebrate the teacher day in various date as per their importance and achievement in education .It is the special day for the appreciation of teacher who has contributed her or him in particular area or community in general. Teachers’ days are distinct from World Teachers’ Day…

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Ashok Hiraman Chavan

देखना हमने सीखा, परखना उसने सिखाया; चलना हमने सीखा, पथ का ज्ञान उसने करवाया; हम तो सीखे थे सिर्फ पाना, देना उसने सिखाया; ऐसे गुरु को अर्पित श्रद्धा नमन जिसने जीना हमे सिखाया। शिक्षक दिवस की शुभ कामनायें! 

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Kisan Walu Rathod

समाजेर लोकुन सोबत लेन, सेन कळान बैठक लेणु ,तो समाजेम काई चालरोच ,लोकुन कळिये जाणीये छाणीये अनुर भी मत मांडिये।अन समाजेती लोक जुडिये।करनच आज ई हालत हेगी से बिखरगे।येन जबाबदार कुण छ? ई गप्तीरो पुजा हेतो काई कैलास? सुप्रभात भियाओ  सेवाभाया र सैनिको ऊठो जागो। एक हे जावो,  गोरबंजारा समाजेरी एकीरी झलक वतावो। नम्रताती…

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Kailash D Rathod

बंजारा भाईयों से एक बात :यह सर्व विदित है कि पुराने जमाने में बंजारा समाज के पास बहुत पशुधन हुआ करता था. यहाँ तक कि पशुपालन उनके जीवन निर्वाहण का बहुत बड़ा जरिया था॰ पशुपालन के लिए वे जंगल में जाते थे और जंगल के पास रहा करते थे, इसी लिए उन्हे बंजारा नाम से…

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Gajanan D. Rathod

भाई भियाओ जुडो अन् समाजेन जोडेर कोशिश करो आपणेन सेवालाल बापूर बोल पुरे करेवास आपणेन स्वतः समाज सागरे माई डुबकी लगाणू पडीय कारण आपणो श्रदास्थान स्व. वसंतरावजी नाईक साहेब काई केगो च की तुम्हाला जर बदल घडवायच असेल तर सुरुवात स्वतः पासून करा वजी काई चावच आपणे न अणि सेवालाल बापू जे वाते केगो च…

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