दर्शन दो सेवालाल Raviraj Pawar
दर्शन दो सेवालाल दर्शन दो सेवालाल लाल मेरी आँखियाँ प्यासी रे ! मन मंदिर कि ज्योति जगा दो, गड- गड वासी रे !! मंदिर-मंदिर घर-घर मे मुरत तेरी फिर भी न दिखे सुरत तेरी ! यह सुभ बेला आयी मिलन की, पुर्णमासी रे !! द्वार दया का जब तु खोले, पंचम स्वर में गूँगा बोले…