धर्म…
धर्म… वलख मार रपीया, काचलीर वलख मार नव गेणारी कुं माणू हिंदू धर्मेन धर्मे मार गोर……।। अलग रेनो ,अलग बाणो अलग छ सण,अलग छ तेवार कुं करण माणू ये धर्मेन…..।। अलग मारी बोली अलग मारी होळी कुं करण भळगे हिंदूम कुं माणू ये धर्मेन….।। मोल छेणी मार बोलीर ये जगेम , सळगो काटा ये धर्मेन..।…