Banjara Gypsy

“बंजारा ‘जात’चोर छ,तार माथेप विमुक्त यी कलंक छ”

​गोर बंजारा तार जात चोर छ तार माथेप विमुक्त इ कलंक छ। लेखक:-सुखी चव्हाण,बदलापुर इंग्रेजेरर आंगाड़ी ब्रिटानी हुकूमत हेती जना गोर समाज लढ़वया व्हेतो ऊ मोगले विरूद्ध महाराणा प्रतापे बरोबर लढ़ो ब्रिटानी हुकूमत जवळ जवळ ५०० जमातींन सूचिबद्द कीदो वो जाती खुप शूर लढ़वय्या व्हेती करन ये जमातींन अपराधी मांनन क्रिमिनल ट्राइब करन घोषित कीदे…

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दोस्तों जो भी करेंगे सच्चे दिल से करेंगे।

दोस्तों जो भी करेंगे सच्चे दिल से करेंगे। क्योंकि जो सच्चे दिल से कोई भी कार्य करता है।वही सही होता है।हमें समाज को जोड़ना है।और हमारे समाज की हर समस्या का हल निकाल के समाज को उस मंजिल तक पहुँचा ना है।जो हम सभी भाईयो का ख्वाब है।इसलिए। हमें सभी भाईयो का योगदान बहूत जरूरी…

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“बंजारा समाज का इतिहास सदियों पुराना हैं”

“बंजारा समाज का इतिहास सदियों पुराना हैं” वैसे तो संपूर्ण भारत देश में भिन्न–भिन्न समाज जाति धर्म के लोग निवास करते हें, जिनमें से एक बंजारा समाज है, जिसका इतिहास वर्षों नहीं सदियों पुराना है । भारत में वर्तमान में बंजारा समाज कई प्रांतों में निवास करता है। महाराष्ट¬, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश एवं…

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“​चांदण रातेर हुंसी कासी”:- भिमणीपुत्र 

“चांदण रातेर हुंसी कासी”   ये हुंसी कासीर खुसी ओ चांदानज मालम..! कासीनं हानू प्रसन्न देखेर विये तो  ओनं चांदण रातेम देखणू कचं हानू डायसाणी केती आरी छ.चांदारो अन गोर कासीरो कायी नातो छ को भा…? इ गुपीत ओर सोबतणे मोटीयारमाल गोर छोरीऊनज मालम  !    पेना इ कासी चांदार मारोणी छ कचं.खरो खोटो इ…

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बंजारा धर्मपिठ एक वैचारिक मतभेद – याडीकार पंजाबराव लालसिंग चव्हाण

गोर गजानन डी राठोड चिफ एडीटर- बंजारा न्युज ऑनलाईन website – www.banjaraone.com भ्रमणधव्नी…..९६१९४०१३७७

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व्यापारी कौम बंजारा नायक थे-बाबा लक्खी शाह

बाबा लक्खीशाह बंजारा का जन्म रायसिना टांडा दिल्ली में हुआ पिता गोघू बंजारा एवं दादा ठाकुर दास बंजारा है । बाबा लक्खीशाह बंजारा हिन्दुस्तान का व्यापारी कौम बंजारा का नायक थें । ये एक बड़े व्यापारी थे जिनके पास दो लाख बीस हजार बैलों की बालदे थी। बाबा लक्खीशाह के आठ सुपुत्र एवं एक सुपुत्री…

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Gajanan Rathod

मार से गोर भाईयो स्वतः बणो स्वतः र समाजेर सिल्पकार मन एकच कयेर छ की आपणेन आपणे समाजे सारु काही तरी करेर छ इ इच्छा लेन आंग आवो अणि चार दनेरो इ जिवण छ अणि कना कना काई व्हेजाय वोरो भरोसो छेनी मन अतरा मालम छ की जिवण एक वेळा मळच तो ये जिवणेम काई…

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गोरबोली भाषेचे अस्तित्व धोक्यात – भीमणीपुत्र मोहन नाईक

*गोरबोली भाषेचे अस्तित्व धोक्यात*- *भीमणीपुत्र* सारखानी- (11.5.018 ) भाषावार प्रांत निर्मितीमुळे गोरबोली भाषेचे मूळ अस्तित्व आज धोक्यात आलेले असून गोरबोली भाषेचे सामाजिक भाषाशास्त्र म्हणजेच भाषा विज्ञान भ्रष्ट होण्याच्या मार्गावर आहे.याची कुणालाही खंत नाही. भारतातील 23 विद्यापीठात भाषाविज्ञान व भाषा अध्ययन विभाग असून;मरण यातना भोगण्यार्या अशा भाषांना आपल्या कवेत घेऊन अशा भाषांचे रक्षण आणि संवर्धन करण्याची…

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Part-6- ANCIENT HISTORY OF GOR BANJARAS

[4] Religious literature: The kings were referred to as Maharaja in the Buddha period. Today the Dhalias while saluting the Naiks proclaim them as ‘Maharaj.’ Naik in turn offers them some donations for entertainment.  [5] Folk Literature: Folk lores, legends, Saki, Kelawat, proverbs, rituals at the time of birth, marriage and death etc. all provide…

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