ये कहानी हर मध्यम व छोटे वर्ग किसान की है।

कहते हैं.. इन्सान सपना देखता है तो वो ज़रूर पूरा होता है. मगर किसान के सपने कभी पूरे नहीं होते बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है. बड़ा खुश होते हुए जाता है. बच्चों से कहता है आज तुम्हारे लिये नये कपड़े…

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प्रा. दिनेश एस. राठोड *Bhimniputra’s Gorpan:* *The Linguistic Beauty in Gorboli Dialect* आंतरराष्ट्रीय इंग्रजी भाषाम ये पुस्तकेर समिक्षात्मक लेखन करन जगेन गोरबंजारार समृद्ध संस्कृती, गौरवशाली इतिहास, लोकसाहित्येर ( *Gor-Banjara’s enriched culture, history and folk literature*) र ओळख गोर बंजारा इतिहासेम पेलीवंळा जगेन ओळख करदिनो – प्रा. संतोष हुनासिंग राठोड भुवन्स कॉलेज मुंबई

*वेगो जयजयकार जगेम* *गोरबंजारा संस्कृतीरो* जय सेवालाल भीमणीपुत्र मोहन नाईक व मारो गुरू प्रा. दिनेशजी न पेलेवंळा नवंळ करूचू *गोरपान* ये पुस्तकेर रुपेती मारो गुरू प्रा. दिनेश एस. राठोड *Bhimniputra’s Gorpan:* *The Linguistic Beauty in Gorboli Dialect* आंतरराष्ट्रीय इंग्रजी भाषाम ये पुस्तकेर समिक्षात्मक लेखन करन जगेन गोरबंजारार समृद्ध संस्कृती, गौरवशाली इतिहास, लोकसाहित्येर ( *Gor-Banjara’s enriched…

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 बंजारा जाग बंजारा जाग…. (बंजारा कविता, कवि.सुरेश राठोड)

!! जाग बंजारा जाग !! जाग बंजारा जाग तारो का सुतो छ वाघ? !!धृ!! तू सतो छी निंदेमं…! वेटागो भलते छंदेमं …!! वेळ आवगी तारो हक्क मांग. !!1!!                 बंजारा  जाग बंजारा जाग… बंजारा गोरमाटी गोरं..! वताओ आपणो जोरं..!! व्होरे एक खिचो मत टांग..!!2!!        …

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बनजारों की प्रमुख समस्या ऊसकी पहचान

बनजारा भारत देश की एक प्राचीन जमात है। जिसकी सांस्कृतिक जडे सिंधु घाटी सभ्यतासे जुडी हुआ है। देश के लगभग सतरह प्रांतो में यह जमात स्थिर-अस्थीर रूपमें निवास करती है। बनजारा, लंबाडा, गोर, सुगाली, लमाणी, गोआर-बाजीगर, नट, ग्वार गोर, गंवारिया, कांगसी, सरकी बनजारा अदि सतरह नामों से देश में यह पहचानी जाती है। जिसकी जनसंख्या…

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!!धर्मेर भानगड़!! कवी:सुरेश राठोड़

!!धर्मेर भानगड़!! धर्मेर लारं मत, लागो गोरमाटी! जगजेष्ठ छरे बापू ,पेनारी धाटी!!१!! धर्मेम रछं खुप काळो जाळो ! ओर पेक्षा धाटीन, आछो वजाळो!!२!! गोरुरी चिंता, बापू सेवान वाटी! करताणी धर्मेती, रकाड़ो ऊ छेटी!!३!! नायकड़ा बी धर्मेरी, वात कोनी किदो! धाटीरो महत्व, ध्याने मायी लिदो!!४!! पेनातीजं हाम छा, निसर्गपुजकं! धर्मेती माज जाय, खुप अराजकं!!५!! जपो साटी…

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आपना समाज अपना अस्तित्व:- गोर कैलास डी राठोड (ठाणे) पश्चिम मुंबई महाराष्ट्र राज्य.

“जय सेवालाल????..जय वसंत..जय बंजारा” …आपना समाज अपना अस्तित्व… आदरणीय सभी गोर बंजारा समाज के युवा तथा बुद्धिजीवी एवं सभी क्षेत्रों मे कार्यरत आधिकारि वर्ग. आप सभी को यह बताने के लिए यह माॅसेज कर रहा हूँ के हमारे भारत देश को स्वातंत्र्यता मिलकर ७० साल के करीब होगये. तो भी हमारे समाज को आज तक…

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World gypsy banjara 8th day

विश्व बंजारा दिवस मध्यप्रदेश में बंजारा महाकुंभ के रूप में मनाया गया

खरगोन : आज के दिन 8 अप्रैल को रोमानी बंजारा दिवस के रूप में मनाया जाता है, मध्यप्रदेश में खरगोन जिल्हे में बीते कई दिनों से बहुत ही जोरो पर तैयारी की गई जो आज भारत भर के सभी बंजारा महानुभावो को आमंत्रित किया गया.  इस कार्यक्रम में लोग हजारो की संख्या में सामिल हुए. …

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गोर विचार

भियाओ सेन सुप्रभात, आचे विचारेती चालो, सेन चलावो, केरी चुके काडते मत बेसो, वोन दुरूस्त करन हातभार लगाडो केरी निंदा-नालस्ती करेम वेळ मत घालो, गुणी लोकुर सोबत चालो, सत्य निस्वार्थ काम करेवाळेर साथ चालो , तम जत भी छो से गोरभाईन जोडो आपसेम वैरभाव मत रकाडो केरी पर बळो-जळो मत, पिसा वास झुको मत ,…

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Sandesh Chavan Gorsikwadi

Prof. Sandesh Chavan profile Gor Sikwadi (Karbhari)

Prof Sandesh ChavanSandesh Chavan MA,PhD(leaved) Eco,MU, a very talented,versatile & handsome personality,Service to man is service to man is his motto,travelled throughout India,reached 12000 TANDAs across India,The Man who is always icon & ideal personality for us. “मारे गोरुन गोर करायूं , गोरुन केसूलानांयी मोरायुं , मुयी मटीन सरजीत करीयू, गोरूर गोरवट राज लांयू !!!”…

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गोरमाटी भाषा व्यवहारे माईर रुढ शब्देर लारेर संस्कृती – एक अभ्यास – भिमनीपुत्रा मोहन नायक

*वाते मुंगा मोलारी* My Swan song *गोरमाटी भाषा व्यवहारे माईर रुढ शब्देर लारेर संस्कृती – एक अभ्यास*..! गोर ‘बोली’ छेनी तो ऊ एक सौंदर्य संपन्न ‘भाषा’ छ.बोली अन भाषा इ प्रस्थापित व्यवस्थार दकान ठोकरे सवायी गोरमाटी भाषानं आचे दन आयेवाळ छेनी.” बोलणार्याची भाषा ऐकणार्याला कळते त्याला भाषा असे म्हणता येईल” हानू भाषातज्ञेर विवेचन छ.बोली अन…

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