भीमणीपुत्र गोर बंजारा साहित्य युगका तेजस्वी तारा, प्रा.दिनेश सेवा राठोड
भीमणीपुत्र मोहन नाईक के प्रयाससे गोरबंजारा साहित्य में एक नया मोड़ आया। इसे विशेषत: तात्कालिक गोर संस्कृति और साहित्य से उत्तेजना मिली। जैसे अन्य साहित्य में ‘रीति’ या ‘काव्यरीति’ शब्द का प्रयोग काव्यशास्त्र के लिए हुआ था। इसलिए काव्यशास्त्रबद्ध सामान्य सृजनप्रवृत्तिऔर रस, अलंकार आदि के निरूपक बहुसंख्यक लक्षणग्रंथों को ध्यान में रखते हुए इस समय के काव्य को ‘रीतिकाव्य’ कहा गया।…