गोर याडीरो ढावलो: एक चिंतन..!
*वाते मुंगा मोलारी* मौखिक परंपराती जिवतो छ जकोण गोरबोली भाषा मौखिक साहित्य इ गद्य अन पद्य ये रुपेमं आज भी देकेन मळचं.गीद अन गीत ये दोइ वाड;मय प्रकार गद्य अन पद्य वाड;मय प्रकारेर उत्कृष्ट नमुना सिद्ध वचं. गोर वाड;मय संस्कृती, सौंदर्य संपन्न गोरबोली भाषा अन अदभुत बानो गेणो, नृत्य, संगीत ये गोर जिवनेर न्यारे पैलू…