गोर बंजारा प्रतिष्ठान बदलापूर आयोजित पांपारिक तीज उत्सव व विद्यार्थी गुण गौरव सोहळा
Gajanan Dhavaji Rathod Chief Editor – Banjara News online portal 9619401377
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“गोर बंजारा तिज महोत्सव 2015” गोर बंजारा समाज कि संस्कृति का सबसे बडा त्योहार माना जाता हैं।इस।साल गोर बंजारा संघर्ष समिती भारत की शाखा डोंगरीपाडा,पातलीपाडा व ब्रम्हांड विभाग जि.बी.रोड ठाणे कि ओरसे बढी धुमधामसे मनाया गया.और बंजारा समाज शहरो मे भी इस त्योहार के चलते बंजारा समाज जुडरहा हैं।इस बात की बहुत खुशी हैं।समाज मे…
बंजारा व अन्य मागास समाजाच्या स्रिया बद्दल अश्लील व असभ्य लिखाण करणाऱ्या ,भालचंद्र नेमाडे या विकृत लेखकाला अटक करण्याची व त्यांना दिलेले “साहित्य आकादमीचे” 1991 चे व 2015 चे “ज्ञानपीठ ” पुरस्कार परत घेण्याची बंजारा क्रांती दलाची मागणी“हिंदू,जगण्याची समृद्ध अडगळ”या आपल्या पुस्तकात श्रीयुत भालचंद्र नेमाडे यांनी बंजारा व अन्य मागास समाजाच्या स्रियांबद्दल अत्यंत हीन पातळीचे…
चिरौंजी के पेड़ भारत के पश्चिम प्रायद्वीप एवं उत्तराखण्ड में 450 मीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है , महाराष्ट्र , नागपुर और मालाबार में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं | इसके वृक्ष छाल अत्यन्त खुरदुरी होती है इसलिए संस्कृत में खरस्कन्द तथा इसकी छाल अधिक मोटी होती है ,इसलिए इसे बहुलवल्कल कहते हैं…
प्रतीनीधि: रविराजएस.पवार…. *सत्यजीवन* आत्मा:- यी परमात्मा कनेती मळी जको अदभुत देणगी छ वोन हमेशा आरदास प्रार्थना ती पवित्र रकाडणु आपणो कर्तव्य छ जतरा पवित्र रकाडीया वतरा आचे “सत्कर्म” आपण हातेती घडीये, ईश्वर यी सृष्टी अतरी सुदंर बणायोच,परंतु आपण स्वार्थ,मोह,माया, घमंड,अहंकार,व्यभिचार,पापेर कारण आँखी रेता भी आंधळे बणगे, सृष्टी न देखेर मनक्यार दृष्टी बदलगीच। दी इंचेर…
रविराज राठोड गोर बंजारा संघर्ष समिती के संयोजक व कायकर्ता समाज कल्याण मंत्री से मिलकर दिये निवेदन पत्र के बारे में पुछते हुए क्रिमीलेयर एक्ट हटाने व जाति प्रमाणपत्र के लिए 1961 के पहले के पुरावे (दस्तावेज) की शर्त हटाने की मांग पर क्या कारवाई की गयी यह पुछने पर समाज कल्याण मंत्री मोघे ने…
“यह कविता उन्ह बचों को समर्पित” जो पाकिस्तान मे हुई घटना मे शहिद हुयें हैं | “मॉ मै आज स्कुल नही जाता,शायद तुम्हे फिर से देख पाता..!! तेरी आवाज सुनने को कान तरसते हैं, देखो ना मॉ बारूदो के गोले बरसरहे हैं..!! सारे बच्चे अपनी अपनी मॉ को पुकार रहे हैं,मॉ येह लोग हमे क्यों…
”वाते मुंगा मोलारी” गोर बोलीभाषार लेखक,साहित्यकार ‘भिमणीपुत्र मोवन नायेक, मामा गोरबोलीभाषार १९९५ सालेती वेगवेगळे पुस्तक लखरेछ. वोंदूर पुस्तक :- *नसाबी* *गोरमाटी-संस्कृती आणी संकेत* *केसुला(कविता संग्रह)* *तुकारी* *क्रांतीसिंह सेवादास तोडावाळो* *मारोणी* *गोरपान(गोर बोलीतील भाषासौदंर्य)* आणि आगामी *लावण* यी पुस्तक लखरेछ. वोदूंर *वाते मुंगा मोलारी* नामेर लेखेम वोदूंर पुस्तकेमायीर संदर्भ देन पेनो,बाणो,धाटी,आसी वेगवेगळी वातेर दर्शन घडारेछ. मोवन…
!!लबाड़ नारीया!! एक वेत्तो नारायण ओरो, नाम लबाड़ नारीया.! हाटेन जावं,हातेमाई , ठालो-पालो झोरीया ……!!१!! लबाड़-सबाड़ बोलताणी , झोरीया भरन लावं .! काम-धंदो छेनी माटी , मस्त फरन खावं………!!२!! परभातीती सांजेतांणू , करतोतो नकाम हादो .! सोतार पिसार तंबाखू बी , कनाजं कोनी खादो…..!!३!!…