“क्लासिकल बंजारा ही शोषक बन गया है”
“क्लासिकल बंजारा ही शोषक बन गया है” अशोक भाई , जय सेवालाल आपकी हिम्मत की दाद देता हूँ । बहुत कम लोग विचारोको खुलेपण से लिखते हैं । आपके संपूर्ण लेख का अवलोकन करने पर लिखने का साहस जूटा पाया हूँ। वर्तमान गोर समाज की वैचारिक गलियां इन दिनों बड़े जोशीले माहोल से चर्चित है।…