श्री.रविराजजी राठोड की उपस्थिति में रामनवमी के शुभ अवसर पर समाज के धर्मगुरु संत श्री सेवालाल महाराज का (भोग)

गोर बंजारा संघर्ष समिती भारत कोनगांव शाखा द्वारा 28 मार्च को जी. बी. एस. एस के संयोजक श्री.रविराजजी राठोड की उपस्थिति में रामनवमी के शुभ अवसर पर समाज के धर्मगुरु  संत श्री सेवालाल महाराज का (भोग) पूजा का आयोजन किया गया था। इस आयोजन के दौरान  गो.ब.सं.स के कोनगांव शाखा अध्यक्ष श्री नंदकुमार पवार ने…

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“रात आंधारीये दिवलो बाळजो”

== रात आंधेरीये दीवलो बाळ दीजो  ।। रात आंधेरीये दीवलो बाळ लीजो  ।। === यी गीद गावं छ. लकेवाळ साबीत लोक लकरे छ. ये गीदेरो आरत – छोरीन बूडीठाढी केरी छ,  ‘ आंधार रात छ, तम दीवो बाळ दीजो.’ वसोज लोकून बूडीठाढी केरी छ, ‘ आंधार रात छ, तम दीवो बाळ लीजो.’ मेरासारू छोरी जतेतोणी…

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व्यसनमुक्ती कायदा कठोर झाला पाहीजे

तंबाखू आणि पान खाऊन रस्त्यात, सार्वजनिक ठिकाणी थुंकणार्या – पिचकार्या टाकणार्यांवर आता कायद्याचा बडगा उगारला जाणार आहे. माजी पंतप्रधान अटल बिहारी वाजपेयी यांच्या सरकारने रेल्वे स्थानकात सिगारेट ओढण्यावर आणि विक्रीवर बंदी घातली होती. त्याच कायद्याचा आधार घेत आणि मुंबई पोलीस कायदा 1951 मधल्या तरतुदीनुसार सार्वजनिक ठिकाणी धुपान आणि थुंकण्यास बंदी असलेल्या कायद्यात आमूलाग्र सुधारणा घडवायचा…

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Ramsing Bhanawat

स्वात्रंत्र्यसेनानी पद्मश्री रामसिंगजी भानावत जयंती चर्चा सभा-ठाणे

स्वात्रंत्र्यसेनानी पद्मश्री रामसिंगजी भानावत जयंती चर्चा सभा, स्थळ :- शासकीय रेस्ट हाउस, कोर्ट नाका जवळ , ठाणे कोर्ट, ठाणे,रविवार, दि: 23 जुलै,२०१७, वेळ :- दुपारी १२- ३   Tag: Padmshree Ramsing Bhanawat Jayanti Mumbai

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आपणेन समाजेर संस्कृती बचईये तो गोर धर्म बचिये |

जय सेवालाल भियावों👏 आपणेन समाजेर संस्कृती बचायर छ | जसो याडी बाप वो आपणेवास समाज छं | समाजेर इतिहास प्रत्येक घरेमाईर नांक्या मोठे आपण भाईन मालम रेयेन चावच.करन आपणेन एकमतेती समाजेन जोडेर काम करेर छ | जर समाज जुडजाय वो वेळान समाजेर एक खुप मोठो इतिहास बणजाय | वो घडीन खरोखर गोर केशुला नई मोरीय.संत…

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​बाबा लखिशाह बंजारा जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं.. 

    लख्खीशाह बंजारा का जन्म 15 अगस्त 1580 को दिल्ली के रायसिना टांडा में हुआ था। पिता का नाम गोधू व दादा का नाम ठाकुरदास बंजारा था। उनके पास दो लाख बीस हजार बैल और बीसियों हजार मालवाहक बैलगाड़ियाँ थीं। उनके एक काफिले में आठ से दस हजार तक बैलगाड़ियाँ होती थीं जिनमें से…

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“क्लासिकल बंजारा ही शोषक बन गया है”

“क्लासिकल बंजारा ही शोषक बन गया है” अशोक भाई , जय सेवालाल आपकी हिम्मत की दाद देता हूँ । बहुत कम लोग विचारोको खुलेपण से लिखते हैं । आपके संपूर्ण लेख का अवलोकन करने पर लिखने का साहस जूटा पाया हूँ। वर्तमान गोर समाज की वैचारिक गलियां इन दिनों बड़े जोशीले माहोल से चर्चित है।…

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