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हम बहूत कुछ कर सकते है

मुझे पता है दोस्तों आज भी मेरे समाज मे निःस्वार्थ और बुध्दीजीवी लोगों की कमी नही है। और आज भी मेरा समाज एक नंबर पर आ सकता है।
लेकिन मुझे दुःख इस बात का है।की मेरे सभी अभ्यासु भाईचारे हमें आज अंध्रश्रदा मे जिरहे है।
भाईयो ऐसा क्यों? एक दौर था जब
हमारा समाज कहाँ था? जब हमारे सेवालाल बापू थे। और हमारे वसंतरावजी नाईक थे?
और आज क्या है?
जरा दो मिनट एकांत मे बैठकर सोचकर देखिए।की हम भी बंजारा है।हम भी बहूत कुछ कर सकते है।उस समय यह सारी टेक्नालॉजीयाँ भी तो नही थी।तो भी उन्होंने हमारे समाज को एकञीत करके रखा था।और जरा यह भी सोचो हम आज अगर करने बैठे तो समाज को कहाँ तक पहूचाँ सकते है।
भाईयो जिंदगी एक ही बार मिलती है।इस जिवन को अगर सफल करना हो तो।निःस्वार्थ से जो भी संघटनाऐ, संस्था, समितीयाँ कार्य कर रही है।उनके साथ जुड़कर समाज को एकजुट करने केलिए आगे आइए।
हमारा जिवन सफल हो जायेगा।
🙏🙏🙏
धन्यवाद

गोर गजानन डी.राठोड
स्वयंसेवक
जी.बी.एस.एस.भारत,
9619401377