गोरमाटीभाषा सौंदर्य, भीमणीपुत्र मोहन गणुजी नायक

*वाते मुंगा मोलारी* My Swan song ✍ *गोरमाटीभाषा सौंदर्य..!* गोरमाटी भाषा व्यवहारेरे संकेते लारं गोरमाटी संस्कृतीरो एक महत्वेरो ऐतिहासिक संदर्भ आढळ आवचं.गोरमाटीभाषा ई गोर वाड;मयीन संस्कृतीरो आरसा छ.गोरमाटी भाषाज जर आपणेनं न वाचतू आवती विये तो ये गोरमाटी भाषारे आरसामं आपणेन आपणेज पेनेबाज संस्कृतीरो मुंडो देखतू आयेवाळो छेनी.गोरमाटी भाषा व्यवहारेमज गोरगणेरो पेनेबाज ऐतिहासिक संदर्भ छ.गोर…

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सभी बंजारा बंधुओं को गणतंत्र दिवस एवं रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई…

आदरणीय समाज बंधुओं जय चारभुजानाथ ! जय सेवालाल ! सभी समाज बंजारा समाज बंधुओं को गणतंत्र दिवस एवं रक्षाबंधन की हार्दिक–हार्दिक बधाई । ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि भाई–बहन के इस पवित्र त्यौहार पर आप सभी के परिवार में खुशियाँ एवं समृद्धि आएं । आजादी के पर्व पर आप सभी देश के प्रति सेवाभावी…

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दूब घास (दुर्वा) ————–

दूब या ‘दुर्वा’ (वैज्ञानिक नाम- ‘साइनोडान डेक्टीलान”) वर्ष भर पाई जाने वाली घास है, जो ज़मीन पर पसरते हुए या फैलते हुए बढती है। हिन्दू धर्म में इस घास को बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग बहुत किया जाता है। इसके नए पौधे बीजों तथा भूमीगत तनों से…

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“तिज त्यौहार एवं तिज का पौराणिक महत्व”

​तिज त्योहार एवं तीज का पौराणिक   महत्व |  तीज का त्यौहार भारत के कोने-कोने में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह त्यौहार भारत के  उत्तरी क्षेत्र में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. सावन का आगमन ही इस त्यौहार के आने की आहट सुन्नाने लगता है समस्त सृष्टि सावन के अदभूत सौंदर्य…

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Vasantrao Naik (Ex. Chief minister of maharashtra)

President Pranab Mukherjee concluded the centenary celebrations of Vasantrao Naik, former chief minister of Maharashtra, on 01.07.2013 at Navy Nagar ,Mumbai .Mukherjee released a postal cover in honour of the leader. He described Naik as a “great son” of Maharashtra and indeed India. “Today we talk about the employment guarantee programme in rural areas but…

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तांडय़ाचा एफआयआर

मी तांडा, पाल, काफीला सारं काही पाहिलं पण कुठच विकास नाही दिसलं. भकास वस्ती, दारिद्रयाची ‘कश्ती’ योजनेला वस्तीची ‘ऍलर्जी’ तरीही तुम्ही ‘ऑल इज वेल’ कसे काय म्हणता…? काळ तंत्रज्ञानाचा आहे म्हणुन… डोकं सुन्न होते तांडा पाहून. उघडय़ावरची मुले… केजलेली फुले.. शिक्षणाची गळती.. वाढते बालकामगार.. सारं काही ओसाड-ओसाड भारतभर फिरले ‘रेणकेजी’ तरीही तुम्ही ‘वेट अँड वॉच’…

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