बंजारा सेनेच्या वतीने मा.नितीन गडकरी यांना निवेदन

नागपूर:- मा नितीन गडकरी केंद्रीय मंत्री (भारत सरकार ) यांची भेट घेण्यात आली. या भेटी दरम्यान बंजारा समाजाला एस टी आरक्षण व ३००-५०० पेक्षा जास्त लोकसंख्या असलेल्या बंजारा तांड्यांना महसूल दर्जा व स्वतंत्र ग्रामपंचायत मिळावा. आणि या संघटनेच्या इतर काही मागण्या आहेत त्या संदर्भात चर्चा करण्यात आली. गडकरी यांनी आश्वासन दिले की, तुमच्या मागण्या विषयी…

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Ramdas Rathod

Banjara Bhaiyo,Jai Sewalal…..RAJ BANJARA paperem aaji CHUNAV BAHISKAR baddal batmi aa meli chha…..Bhau Nirnay Sahamatiti lo..Chunav Bahiskaren hamar virodh chha..Virodh ka chh,ye babat hamari Bhumika ham tamar sarir mudang Mel kele chha…pach e mandhakai ka chha…Himmat chha to aapan aapno aadmi apaksha hubho Kara.pan hatemer hatyar ka gamava….apane aapnem karan nastana vad mat karo..samajik bhan…

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Martiya Ramchand bhukiya

बंजारों में नये वर्ष की शुरुवात कहा से हुई – Martiya Ramchandiya Bhukiya

चैत्र पाडवाती मराठीरो नवो साल ( गुडी पाडवा ) रछं. येरो कारण मन केतू आव कोनी. १ जानेवारीती आंघरेजीरो नवो साल रछं. येरो भी कारण केतू आव कोनी. पणन दांढी ( हेंढगी ) पूनमेती होळी पूनमेतोणी फाग मीना रछं. नीसरग नीयम दीटे तो ये मीनाती वाळ, पाणी, झाड, जीतरप, जणगाणी, सेवा, जेतार फागं छ. कतो,…

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“Gorpan: The Linguistic Beauty In Gor Boli Dialect”

Good news for World’s Gor-Banjara ——————————————————– Gorpan :The Lingustic Beauty In Gor Boli Dialect” [A Detailed critical analysis & Translation] *Prefacd and written by-Prof.Dinesh S.Rathod* Bhimniputra’s – Gorpan:Gor Bolitil Bhashya Saundarya   (Available in English version)   Tanda literature is an idiotic poetry and expectancy as he state of thinking or hoping that something, specially…

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“गोर बंजारा साहित्य निर्माण करना जरूरी है”

2017 मे होने वाले अखिल भारतीय बंजारा साहित्य सम्मेलन मे सभी समाजे के साहित्यकार तथा बुद्धिजीवी आधिकारीयों एवं युवाओं को भाग लेने की आशंका है। युवाओ को साथ जुडकर  हमे समाज कि परंपरा और संस्कृती को बढ़ावा देने कि कोसिश करनी चाहिये। गोर कैलास डी.राठोड

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वाते मुंगा मोलारी – भीमणीपुत्र

*वाते मुंगा मोलारी*              My swan song *केयेवाळेतीवाते सामळेवाळो चतर चावचं*       “गोरबोली भाषा माइर गोरबोली भाषारो स्वतंत्र स्वरुप शास्त्र, भाषार सौंदर्य चावळतूवणा अभ्यासकेन तारे परेर कसरत करणू लागचं;काहा कतो गोर लोकसाहित्य इ पिढी दर पिढी मोखिक परंपराती जगतो आयो छ.करन साहित्य रचना माइर अपभ्रंशरुप अभ्यासकेन धुंडन काढणो गरजेर…

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“इंसानियत तथा मानवता सबसे बड़ा धर्म हैं”

“इंसानियत तथा मानवता सबसे बड़ा धर्म हैं”  कहते हैं दुनिया में कोई ऐसी शक्ति नहीं है जो इनसान को गिरा सके, इन्सान ,इन्सान द्वारा ही गिराया जाता है । दुनिया में ऐसा नहीं है कि सभी लोग बुरे हैं, इस जगत में अच्छे-बुरे लोगों का संतुलन है । आज संस्कारों का चीरहरण हो रहा है…

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आदलीको पीसू बा​ई,पालीको पीसू ये,गोरमाटी कविता युवा पीढ़ीरो कवि,लखनकुमार जाधव 

​*** आदलीको पीसू बा​ई,पालीको पीसू ये*** मोलेर छ चकेती,गोरमाटी तारी धाटी पेनार जमानेम जना,खायेसारू बाटी का भूलरोची तू,वाते ये गोरमाटी  कांयी घणे मोलेर,वेतीती वू घटी… चली आवचं घटी,बकम वरसेती आटो पीसं दादी-याडी,घणे वो हुसेती दणीया माईर पेल चकीती,वेगोची का छेटी कांयी घणे मोलेर,वेतीती वू घटी… (1) राम पोरेमाई जना,पीसा जावं आटो कुकडो बांग दीयं जना,सेज…

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