रविराज एस.पवार
प्रभु का नाम नहीं जपा तो जीवन किसी काम का नहीं परम पूज्य स्वामी सत्यानन्द महाराज जी द्वारा रचित भक्ति प्रकाश ग्रन्थ का एक अंश. मन तो तुम मैं रम रहा, केवल तन है दूर. यदि मन होता दूर तो मैं बन जाता धूर. भावार्थ: एक जिज्ञासु परम पिता परमात्मा को शुक्रिया अदा करते हुए…