गोर बंजारा समाज के आधार तथा आस्था वाले नेता गण तथा संघटन नायक के बारे
आज हमे ऐसा चित्र नजर आ रहा है। की हर कोई नेता होना चाहता है !एक झुण्ड(ग्रुप) बनानेका सहविचारी लोगोके लेके संघटन स्थापित हो रहा है । अच्छी बात है हजारो संघटन हो लिकिन उद्देश् एक होना जरूरी हो । कोई एक मंच पर सविस्तर चर्चा के आधार पर विषय का हल ढूंढने कीेे मानसिकता…