विश्व बंजारा दिवस

बंजारा समाज और संस्कृति विश्व में आद्वितीय है हमारी संस्कृति के अन्दर समस्त धर्मों, जातियों की संस्कृति मिश्रित है। यूं कहे बंजारा संस्कृति विश्व की संस्कृति है। विश्व के अधिकांश देशों में बंजारा जनजाति निवासरत है, यह अगल बात है कि किसी–किसी देश इस जनताति को अलग नाम से जाना जाता है। अभी हाल ही…

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“गोर माटी कवितार माध्यमेती लोक नेता सुधाकरराव नाईक येंदुन श्रद्धांजली”

——— सुधा——–   तु आज चायवाळ रस….. सिमेर परं विठोबा……! कुंण जावं आतरी दुर… गाडीलारं नळीया, पायो पंढरपुर !! फुकट मळतो तो से, हर रेल चालं, वोतेताणी खावचं ! आदत पडगी हामेनं कीसे आयतोच मळजावचं!! केयेनज हाम शुर छा, मुंडेमायीच जोर छ.! यी वोळक मेलेच वो, करनचं बिनघोर छ.!! होळी आयेनी बुंबडी मारेती, ! हामारो लोयी…

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जय गोर बंजारा बोलो आझाद मैदान चलो ।

🚩 जय सेवालाल बोलो मुंम्बई चलो। 🚩  जय गोर बंजारा बोलो आझाद मैदान चलो । गोर बंजारा समाज की अनेक सामाजिक संस्थओं द्वारा गठित ================= “गोर बंजारा संविधानिक हक्क महासमिती ” =================  👊  द्वारा विराट मोर्चा 👊 18/03/2015 बुधवार सुबह 10:00 बजे स्थल-: आझाद मैदान सी एस टी. स्टेशन के सामने, मुंबई      …

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Sant Sevalal Maharaj

सिक आन सिकवाडी, मतलब काई छ ( Sikwadi)

आज गोरसिकवाडी ई शब्द नाने मोटेर मुंडेपर छ. गोरसिकवाडी ई आज ट्रेड मार्क (व्यापार चिन्ह ) बणगोच. पण आजेर पिढीन सिक आन सिकवाडी केन कछ इच मालम न रेयर कारण बोलतुवणा ११२ इंच छाती फुलान कछ गोरुन फक्त गोरसिकवाडीच आंग लेजा सकछ . ई आजेर पिढीरो अज्ञान केयेपेक्षा उनुन सिक आन सिकवाडी येमांईरो फरकच कोई…

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Gor-Banjara Jan Jaati ka itihaas (Hindi), By Pro. Motiraj Rathod

Gor-Banjara Jan Jaati ka itihaas (Hindi), By Pro. Motiraj Rathod (History, Research & Resource book on Gor Banjara jan-jaati) Author/Writer: Prof. Motiraj Rathod, (M.A (Hindi), M.A. (Marathi), M.Phil, Gor-Banjara colony, Aurangabad first published : 2003 Contact for Books: +91- 94237 05977 गोरबंजारा जन जाती का इतिहास ANCIENT HISTORY OF GOR BANJARAS Written by: Prof. MOTIRAJ…

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​वोसो, केरो छं

​वोसो, केरो छं शुद्र पेदा का वेगे हारीजण पेदा का वेगे , पेदा वेयेरो कारण छं , दनीयाम वर्ग (classes ) जमानेती छं . पणन वर्ण , वर्ण हिंदूसतानेर आपणो येक मातो छं , वर्ण ये दनीयाम कतीज छेनी, वर्ग  (classes) जमानेती छं, कोयी गोरगरीब वे सकं छं तो कोयी मालदार (पीसा आदला) वाळो वे…

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अनवाल -“मराठी,हिंदी भाषार प्रभावेती गोर बोलीभाषारो मूळ अस्तित्व धोकेम” :-भिमणीपुत्र मोहन गणुजी नायक

अनवाल -“जतरा मराठी,हिंदी भाषार प्रभावेती गोर बोलीभाषारो मूळ अस्तित्व धोकेम आयो;ओतरा तेलगु अन कानडी भाषाती गोर बोलीभाषारो अस्तित्व धोकेम कोनी आयो.आज भी आंध्र,तेलंगणा,कर्नाटक राज्येमं गोरबोली भाषा सुरक्षित छ.पुर्वाश्रमीर आदलाबाद जिल्हा माईर किनोट,मोवर तालुका माईर तांडेऊमं इ.स.१९९५ सालेताणू गोरबोली भाषा अन मौखिक वाड;मय जिवतो रं. करन गोर मौखिक वाड;मयेर आधारेपं मनं थोडा घणो सायित्य निर्माण करतो…

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—आप बिती—

___आप बिती……. कोणत्याही क्षेत्रात कार्यरत असताना जसजशी प्रगती सुरु होते तसतसा छुपा विरोध हा वाढू लागतोच; सुंदर वेलीच्या खोडावर बांडगुळ वाढावा तसा. हा निसर्गाचाच नियम आहे.पण आपल्याला त्याची पुसटशीही कल्पना नसते. मग तुमची प्रगती डोळ्यात सलते आणि डोक्यात भनाणु लागते तेव्हा कारस्थानांच्या बिया पेरल्या जातात. खुरटय़ा विचारांचे कावळे एकत्र जमू लागतात आणि व्रणार्त शिशूच्या पंखावर…

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मारो टांडो…..

मारो टांडो….. दुनिया रे ऐ नक्से में कत खो गो छे मारो टांडो। कबेइ याद करूँ छूं ओ बचपने रे दिन, दादा रे किस्सा, ओरे कन्धा पे बेठन टांडे में घुम्णों, आफ़ेर संगेरे बाडकुर संग खेलणों। बेचैन कर देमे छें आफ़ुरे टांडे री यादें, खेतू री हरियाली, भुंडा रे पेडेरे आम सतामे छें, रुवावें छें,…

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