गोमाता की पीड़ा
दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया… अपने बच्चे से भी छीना पर मैंने तुमको दूध दिया🐄… रूखी सूखी खाती थी मैं, कभी न किसी को सताती थी मैं…🐄 कोने में पड़ जाती थी मैं, दूध नहीं दे सकती मैं,🐄 अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों की आग से तूने, भोजन…