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क्रांतिकारी लमाणी बंजारा समाज…

ब्रिटीशाच्या काळी बंजारा समाज क्रांतिकारी म्हणून ओळखला जात असे. तोआदिवासी जमातीत गणला जाई. मात्र, आदिवासींना मिळणाऱ्या सवलतींसाठीहा समाज आजही पात्र समजला जात नाही. लंबाडी, सिंगाडी बंजारी, धेडोरोबंजारी, लमाणी अशा वेगवेगळ्या नावांनी परिचित असलेला हा समाज भारतभर मात्र एक भाषा, एक संस्कृती’ टिकवून आहे. गोरमाठी ही त्यांची भाषा. या भाषेलाही अद्याप राजमान्यता मिळालेली नाही. काही जमातींना…

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परभाषीय शब्देर तिरस्कार इ अभिव्यक्ती सामर्थ्येर गळचेपी ठरचं.अन इ गळचेपी भाषानं मारक ठरचं.गोरबोली भाषा सदा येनं अपवाद छेनी.

​वाते मुंगा मोलारी My Swan Song परभाषीय शब्देर तिरस्कार इ अभिव्यक्ती सामर्थ्येर गळचेपी ठरचं.अन इ गळचेपी भाषानं मारक ठरचं.गोरबोली भाषा सदा येनं अपवाद छेनी. “पेनार वाणीर शब्देर म समर्थक छू.पेनारवाणीर शब्देर शब्दकोश वेणू इ अत्यंत गरजेर छ.पेनारवाणी माईर भुलाडी पडगे  जकोण शब्द होटो आन जर गोरबोली भाषामं रुढ वेगे तो गोरबोली भाषा वजिक श्रीमंत,समृद्ध वे…

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सुभाष राठोड यांची पदोन्नती

हिंगोली (प्रतिनिधी) – श्री सुभाष बाळाराम राठोड हे उपलेखापाल या पदावर जिल्हा नियोजन समिती जिल्हाअधिकारी कार्यालय हिंगोली येथे कार्यरत होते. त्यांची आता सहाय्यक लेखाअधिकारी या पदावर पदोन्नतीने पदस्थापना महिला व बालविकास कार्यालय नांदेड येथे झाली आहे. सुभाष राठोड हे रा.काळूनाईक तांडा, दाबदरी ता.हिमायतनगर येथील रहिवाशी आहे. त्यांच्या ह्या पदोन्नती बदल सर्व मित्रवर्गानी, नातेवाईक व संपादक…

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“पिता को क्या चाहिये? सिर्फ सम्मान जनक जिंदगी”

​” पिता को क्या चाहिये..?सिर्फ सम्मान जनक जिंदगी” एक पिता ने अपने पुत्र की बहुत अच्छी तरह से परवरिश की !उसे अच्छी तरह से पढ़ाया,लिखाया ,  तथा उसकी सभी आर्थिक, शैक्षणिक , सभी कामनाओ की सभी तरह से  पूर्ती की ! फलस्वरूप उसका पुत्र एक सफल इंसान बना और एक मल्टी नेशनल कंपनी में सी…

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सालो से पुरे देश मे अपना गोर बंजारा समाज न्यायवंचित

दोस्तों भाईयों और बहनों कई सालो से पुरे देश मे अपना गोर बंजारा समाज न्यायवंचित है। इस समाज को आज तक शासन की ओर से कभी भी न्याय नही मिला है। और इस मुद्दे पर अपने समाज के नेताओं ने भी एक होकर समाज को न्याय दिलाना जरूरी नही समझा यह गंभीरता से सोचने कि…

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करेला

करेला के गुणों से सब परिचित हैं | मधुमेह के रोगी विशेषतः इसके रस और सब्जी का सेवन करते हैं | समस्त भारत में इसकी खेती की जाती है | इसके पुष्प चमकीले पीले रंग के होते हैं | इसके फल ५-२५ सेमी लम्बे,५ सेमी व्यास के,हरे रंग के,बीच में मोटे,सिरों पर नुकीले,कच्ची अवस्था में…

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जैसा हमे बताया गया है, हम वैसे नही है

दोस्तों , में प्रदीप मानावत ये बतना चाहता हूँ कि वास्तव में बंजारा को जिस नज़रिये से हमें भारतीय फिल्मों ने दर्शाया है, आजतक हमे उसी नाम से जाना जाता हैं, परन्तु लोगो को हमारी वास्तविकता का अभी तक पता नही है की हम लोग असली क्षत्रिय गोर वंशों की वंशावली में आते है, मुगलों…

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दामणी भांदेरो अन् दामणीर कानी काडेरो इ होळीर समारोप प्रतिकात्मक अनुकरण Symbolic छ.- भिमणी पुत्र मोहन नायक

वाते मुंगा मोलारी my swan song दामणी भांदेरो अन् दामणीर कानी काडेरो इ होळीर समारोप प्रतिकात्मक अनुकरण Symbolic छ…! “गोरमाटी गणसमाजी लोकजीवनेम् साल भरेम् जतरा भी सण – उत्सव वेते रच् ये से नैसर्गिक घटकेर प्रतिकात्मक अनुकरण Symbolic छ. आपण जे कराचा ओसोज भारेर जितरपेम् (सृष्टीम्) घडच् हानू आदिम मानवेर समजूत रं.ये समजूतीनज समाज शास्त्रेरो…

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 गोर बोलीभाषार लेखक,साहित्यकार ‘भिमणीपुत्र मोवन नायेक,  गोरबोलीभाषार १९९५ सालेती वेगवेगळे पुस्तक लखरेछ.

​”वाते मुंगा मोलारी” गोर बोलीभाषार लेखक,साहित्यकार ‘भिमणीपुत्र मोवन नायेक, मामा गोरबोलीभाषार १९९५ सालेती वेगवेगळे पुस्तक लखरेछ. वोंदूर पुस्तक :- *नसाबी* *गोरमाटी-संस्कृती आणी संकेत* *केसुला(कविता संग्रह)* *तुकारी* *क्रांतीसिंह सेवादास तोडावाळो* *मारोणी* *गोरपान(गोर बोलीतील भाषासौदंर्य)* आणि आगामी *लावण* यी पुस्तक लखरेछ. वोदूंर *वाते मुंगा मोलारी* नामेर लेखेम वोदूंर पुस्तकेमायीर संदर्भ देन पेनो,बाणो,धाटी,आसी वेगवेगळी वातेर दर्शन घडारेछ. मोवन…

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