बंजारा कविता
ना छुरी🔪 रखता हुं ना पिस्तौल रखता हुं बंजारा का बेटा हुं दिल में जिगर रखता हुं इरादों मे तेज़ धार रखता हुं इस लिए हंमेशा अकेला ही निकलता हु ———————-ँ बंगले . गाडी तो ” बंजारा ” की घर घर की कहानी हैं……. . . तभी तो दुनिया ” बंजारा ” की दिवानी हैं….